आज जब में लिख रहा हूं तब हम सभी भारतवासियों ने लगभग 50 दिन भारत सरकार व राज्य सरकारों के निर्देशों कि पालना करते हुए लॉक डाउन का अनुभव किया है ।
असली भारत आज भी गावों में निवास करता है और गावों के लोगो को आज कुछ नया सीखने को मिल रहा है, हम सब नए शब्दों से परिचित हो गए है जैसे वायरस, लॉक डाउन, कर्फ्यू, धारा 144,आदि ।
एक गांव के लोग अपने सगे संबंधियों से बातचीत कर रहे है जो इस माहौल में दूसरे गांव में निवास कर रहे है । उनके हाल - चाल जान रहे है । बुजुर्ग भी अपने मुंह को कपड़े या मास्क से ढकते दिख रहे है, उनके भी जीवन का यह पहला अनुभव है कि एक वायरस ने मानव जाति को घुंटने टीका दिए है ।
लोग एक दूसरे से दूरी बना रहे है, गावों में होने वाली चौपाल, पंच- पंचायती कही दिनों से बन्द पड़ी है ।
सभी ग्रामवासियों के मन में एक ही सवाल आ रहा है कि "आगे क्या होगा" ।
कोरोना अब धीरे धीरे गावों में पैर पसार रहा है,जिन गावों में कोरोना संक्रमित व्यक्ति मिल रहे है उन्हें बन्द किया जा रहा है,लोगो को घर में ही रहने की हिदायत दी जा रही है । अब चूंकि सोशल मीडिया का प्रभाव ग्रामीण आंचल में भी ज्यादा हो गया है तो लोग बहुत जागरूक व सचेत हो रहे है ।
आज भारत में कोरोना संक्रमण के मामले चीन से भी ज्यादा बढ़कर 85,940 हो गए है तो भारत के गावों में भी चिंता बढ़ गई है । प्रधानमंत्री श्री नरेन्द मोदी जी ने भी गावों के प्रति अपनी चिंता जाहिर की है तथा सभी राज्यो के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में भी उन्होंने कहा है को कोरोना गावों में नहीं फेलना चाहिए इसके लिए आवश्यक प्रबन्ध करे ।
ग्रामीण इलाकों से जो लोग बड़े सपने लेकर अन्य राज्यो में कमाने गए थे वे भी गांव लौट रहे है और लौटने के इंतजार में है। उनकी जुबानी से सिर्फ एक ही बात निकल रही है कि "जिंदा रहे तो पैसे कमाने को तो जिंदगी पड़ी है" तो आप समझ सकते
है कि कोरोना को लेकर कितनी चिंताएं है ।
हम सब उम्मीद करते है कि विश्व और भारत राष्ट्र भी जल्द इस महामारी से उभर जाएगा । और हम सब उसी दुनिया में जल्द लौटेंगे जिसमें हम पहले जीवन व्याप्ति कर रहे थे ।
इस महामारी से जिसने भी अपने परिवारजनों को खोया है उनके प्रति हम अपनी भावना प्रकट करते है ।
जल्द ही हम वापस उमंगों भरी दुनिया में वापस लौटेंगे ।
तब तक अपने घर में रहे, सुरक्षित रहे, अपना व अपनों का ख्याल रखे ।
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