Wednesday, 11 November 2020

बिहार चुनाव का राजनीतिक विश्लेषण

 बिहार चुनाव का राजनीतिक विश्लेषण :

बिहार चुनाव: NDA को पूर्ण बहुमत, आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी, अच्छी शुरुआत के बाद भी बहुमत से दूर रह गया महागठबंधन

बिहार विधानसभा (Bihar Election) की 243 सीटों पर तीन चरणों में हुए मतदान की मंगलवार देर रात को मतगणना संपन्न हुई ।

इस बार बिहार में मुकाबला काफी दिलचस्प रहा । केंद्र और राज्य की सरकारों ने अपने संपूर्ण संसाधन एवं भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व, नरेन्द्र मोदी जी, अमित शाह जी, नीतीश कुमार जी ने अपनी पूरी ताकत बिहार चुनाव पर झोंक दी थी ।

देर रात को अंतत NDA बहुमत के आंकड़े के को पार कर पाई । एनडीए को 125 तो महागठबंधन को 110 सीट पाने में कामयाबी मिली, यह चुनाव कोरोना महामारी के बीच पहला सबसे बड़ा चुनाव है ।

एनीडीए ने मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर मौजूदा सीएम नीतीश कुमार को ही पेश किया तो महागठबंधन की ओर से 31 साल के तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार थे ।

चुनाव आयोग के मुताबिक़ इस बार 57.05 फ़ीसदी लोगों ने मतदान किया जो कि 2015 से ज़्यादा है. पांच साल पहले 56.66 फ़ीसदी मतदान हुआ था ।

आरजेडी और कांग्रेस ने बिहार विधानसभा चुनावों की मतणना में गड़बड़ी के आरोप लगाया है और ये दोनों पार्टियां इसे लेकर चुनाव आयोग के पास भी गईं. हालांकि बाद में चुनाव आयोग के सेक्रेटरी जनरल उमेश सिन्हा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि चूनाव आयोग किसी भी तरह के दवाब में आकर काम नहीं करता है ।

इस चुनाव में बीजेपी के सामने गठबंधन को संभालने के अलावा दूसरी चुनौती विपक्ष था जिसमें नई जान फूंकी आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने. उन्होंने धर्म और जाति की जगह लोगों के मुद्दों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य को अपने प्रचार का आधार बनाया । तेजस्वी यादव के 10 लाख नौकरियां देने का वायदा इतना लोकप्रिय हुआ कि बीजेपी को भी इस मुद्दे को अपना एजेंडा बनाना पड़ा ।

 बिहार के नतीजे साफ बताते हैं कि जातीय सघनता वाले इलाकों में वोटरों ने अपनी ही जाति का समर्थन किया है। अति पिछड़ों और अल्पसंख्यकों ने सीमांचल में नीतीश कुमार का साथ दिया तो उच्च जातियों ने बीजेपी का। इसके अलावा बिहार एम-वाई समीकरण यानी मुस्लिम-यादव वोटर अभी भी आरजेडी के साथ ही जुड़ा हुआ है।

कांग्रेस ने इस चुनाव में 70 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, और उसके हिस्से में 19 सीटों पर जीत आई और उसने 9.75 फीसदी वोट हासिल किए। यह औसत आरजेडी, बीजेपी और जेडीयू से कम है। इन तीनों दलों ने कांग्रेस के मुकाबले कहीं अधिक सीटों पर चुनाव लड़ा और उनका जीत का औसत काफी अच्छा रहा. कांग्रेस पार्टी को अपने परिणामों पर समीक्षा की सख्त जरूरत है ।

31 साल के युवा तेजस्वी यादव का मुकाबला उनकी उम्र से अधिक राजनीतिक अनुभव वाले दिग्गज नेता नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से था। तेजस्वी इनसे आगे तो नहीं निकल पाए, लेकिन पीछे भी नहीं रहे। पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के बेटे तेजस्वी ने अपने नेतृत्व में लड़े गए पहले ही चुनाव में जिस तरह का प्रदर्शन किया है उससे उन्होंने यह साबित कर दिया है कि पिता की विरासत से मिली राजनीतिक विरासत को वह आगे ले जाने में सक्षम हैं। तेजस्वी यादव एक अच्छे नेता बनकर उभरे है. तेजस्वी ने जनता से जुड़े मुद्दों को इस चुनाव में प्रखरता से रखा जिसकी पूरे देश में सराहना कि गई ।

- महेन्द्र कुमार
  #जालोर

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